Solar Battery

इन्वर्टर बैटरी कैसे बनती है inverter battery manufacturing process

इन्वर्टर बैटरी कैसे बनती है inverter battery manufacturing process

आज के समय में सभी लोग इनवर्टर बैटरी का यूज कर रहे हैं और उम्मीद है की आपके घर में भी और इनवर्टर होगा और उसके नीचे बैटरी भी होगी तो क्या कभी सोचा है कि आपने की इनवर्टर बैटरी कैसे बनती है यह कितने प्रकार की होती है और इन्हें बनाने के लिए किस-किस Components का इस्तेमाल किया जाता है.

यदि नहीं पता तो आज किस पोस्ट में हम इनके बारे में पूरी जानकारी देने वाले हैं कि सोलर बैटरी कितने प्रकार की होती है इसे बनाने के लिए किस-किस सामान की जरूरत होती है तो यदि आपको भी यह जानना है तो इस पोस्ट को पूरा लास्ट तक जरूर पढ़ें.

Types of Lead-acid Battery

लेड एसिड बैटरी कि यदि हम बात करें तो इनका साइज अलग-अलग होता है यानी कि जो आप अपने घर में अपने इनवर्टर के साथ में जो बैटरी यूज कर रहे हैं या तो वह फ्लैट प्लेट इनवर्टर बैटरी होगी यानी कि छोटी बैटरी या फिर tubular बैटरी होगी या फिर आपके साधनों में इस्तेमाल होने वाली बैटरी जैसे की गाड़ी में ऑटो में, ई-रिक्शा आदि में जो बैटरी होती है वह भी लेड एसिड बैटरी होती है यह सभी बैटरी एक ही होती है लेकिन इनका साइज अलग – अलग हो सकता है लेकिन इनका जो बनाने का तरीका और इन बैटरीयों को बनाने के लिए जो Component होते है वह हर बैटरी में एक ही होते है तो हम यहां पर किसी भी बैटरी की प्रोसेस समझाएं तो वह सब में सेम ही होगा

Components of lead-acid battery

लेड एसिड बैटरी की प्रोसेस कि यदि हम बात करें तो इसको बनाने के लिए 6-7 Components की जरूरत होती है जिसे मिलाकर इस बैटरी को बनाया जाता है जैसे कि

1. Container
2. Vent plug
3. Terminals
4. Plates
5. Separator
6. Cell Packaging
7. Acid

इनमें से दोस्तों आपको Container, Vent plug और Terminals यह तीनों चीज आपको बैटरी के बाहर की साइड ही देखने को मिल जायेंगे तो चलिए दोस्तों अब एक-एक करके जान लेते हैं कि इन Components का कैसे बैटरी बनाने में इस्तेमाल किया जाता है .

1. Container

Container बैटरी के बाहर जो प्लास्टिक का कवर होता है उसे बोलते हैं और यह प्लास्टिक का बना होता है इस Container को बनाने के लिए छोटे-छोटे प्लास्टिक के दानों का इस्तेमाल होता है और यह दाने जिस रंग के होते हैं वह Container उसी रंग का बनता है आपने अक्सर बैटरी देखी होगी हरे रंग की नीले रंग की लाल रंग की तो यह इसी तरह से बनती है यह सभी प्रकार के दाने एक मशीन के अंदर डाले जाते हैं फिर यह मशीन कंटेनर बना कर देती है जिसे जिस साइज के कंटेनर की जरूरत होती है उसी साइज की अलग-अलग मशीन होती है

2. Lead Ingots Manufacturing Process

लेड एसिड बैटरी के नाम में ही लेड आता है तो इसी तरह लेड एसिड बैटरी के लिए लेड बहुत ही इंपॉर्टेंट Component होता है यहां पर यदि हम लेड की बात करें तो लेड पुरानी बैटरीयों के अंदर से निकाला जाता है और उनको पिंघला कर उनके Ingots तैयार किए जाते हैं और यह जो Ingots होते हैं यह प्योर फॉर्म में नहीं होते हैं इनके अंदर काफी प्योरेटिज होती है तो इनको एक भट्टी के अंदर डाला जाता है और वहां पर इनके अंदर जो इंप्योरिटीज होती है.

उनको निकाल लिया जाता है और उसके बाद इनको दोबारा पिघलाकर एक डाइ में डाल लिया जाता है और एक नया Ingot तैयार किया जाता है इसके बाद एक स्पेक्ट्रो मशीन होती है जहां पर इनका टेस्ट किया जाता है वहां पर देखा जाता है कि इसके अंदर जितनी भी इंप्योरिटीज है वह निकल चुकी है या नहीं और अगर निकल चुकी है तो इनको आगे भेज दिया जाता है लेड एसिड बैटरी के ग्रिड तैयार करने के लिए.

3. Battery Grid Casting Machines & Process

ग्रिड तैयार करने की दो मशीन होती है एक ग्रेविटी कास्टिंग मशीन होती है दूसरी प्रेशर डाई कास्टिंग मशीन होती है जो प्रेशर डाई मशीन होती है इनसे ट्यूबलर ग्रिड्स बनाई जाती है और जो ग्रेविटी कास्टिंग मशीन होती है इनसे नॉर्मल ग्रिड्स बनाई जाती है जिनको फ्लैट प्लेट बैटरीज में यूज किया जाता है जो ट्यूबलर ग्रिड्स होती है इनको तैयार करने के लिए इनके ऊपर ट्यूबलर बैग चढ़ाया जाता है जोकि पॉलिस्टर मटेरियल का होता है और इसके बाद इनके अंदर फीलिंग भरी जाती है जिसके बाद यह प्लेट रेडी होती है.

4. Battery Grid Pasting Process

ग्रिड्स पूरी तैयार होने के बाद इनको आगे भेजा जाता है जहां पर इनकी पेस्टिंग की जाती है इन ग्रिड्स के ऊपर जो पेस्टिंग होती है वह भी लेड मटेरियल की होती है लेकिन इनके अंदर अलग-अलग एलिमेंट्स होते हैं जिनके कारण यह नेगेटिव और पॉजिटिव प्लेट में बनकर तैयार होती हैं और जिन ग्रिड्स में पेस्टिंग ठीक से नहीं होती है उनको निकालकर अलग कर दिया जाता है .

पोस्टिंग होने के बाद ग्रिड्स को प्लेट्स कहा जाता है और इनको जवाब देखोगे तो यह जो नेगेटिव प्लेट होती है यह ग्रे रंग की होती है और जो पॉजिटिव प्लेट होती है वह ब्राउन रंग की होती है.
यहां से आपको पता चलेगा कि कौन सी नेगेटिव प्लेट होती है और कौन सी पॉजिटिव प्लेट होती है इनको बनाने का पूरा प्रोसेस सेम ही होता है लेकिन इनके पेस्टिंग में जो एलिमेंट होते हैं उनकी वजह से यह नेगेटिव और पॉजिटिव हो जाती है.

5. Battery Plates Curing Process

यह ग्रिड पूरी तरह से सूख जाने के बाद इनका क्यूरिंग टेस्ट होता है जहां पर इनको एक चेंबर में डाल दिया जाता है वहां पर भाप होती है और 60 से 72 घंटे तक इनको इस चेंबर के अंदर रखा जाता है और इसके बाद में इन प्लेट्स को बाहर निकाल दिया जाता है और इसके बाद में ड्राइव ओवन में इनको डाला जाता है यहां पर हीट के कारण इन का मोक्स्चर पूरी तरह से खत्म कर दिया जाता है ड्राइव ओवन में से बाहर निकाल कर इन प्लेट्स को 1 दिन के लिए रूम टेंपरेचर में रख दिया जाता है.

जब यह प्लेट्स तैयार हो जाती है तब इन प्लेट्स को असेंबल किया जाता है असेंबल करते समय पॉजिटिव प्लेट नेगेटिव प्लेट से कम होती है जैसे कि एक बैटरी में टोटल 7 प्लेट होती हैं तो उसमें से चार प्लेट नेगेटिव होती है और तीन प्लेट पॉजिटिव होती है और प्लेट्स के इन ग्रुप को सेल कहा जाता है इसके बाद सेल पर वेल्डिंग करके टर्मिनल बनाए जाते हैं

6.Lead-acid Battery Assembly Process

इसके बाद इन सेलों को कंटेनर के अंदर डाला जाता है बैटरी बनाने के लिए एक कंटेनर में 6 सेलों को डाला जाता है और उसके बाद सभी सैलो को सीरीज में जोड़ा जाता है और एक सेल 2 वोल्ट का होता है तो इस तरह से 6 सेल 12 वोल्ट के होंगे तो इस तरह से हमारी बैटरी 12 वोल्ट की बन जाती है इन सेलों को बैटरी के अंदर डालने के बाद वेल्डिंग मशीन से आपस में जोड़ा जाता है और इन सेलों को आपस में जोड़ने के बाद इनकी टेस्टिंग की जाती है और इस टेस्टिंग के बाद बैटरी के ऊपर कैप लगाई जाती है और यह कैप मशीन से लगाई जाती है ताकि यह मजबूती से लग जाए और यह कैप लगने के बाद बैटरी की वेक्यूम टेस्टिंग होती है.

जिससे यह पता लगता है कि बैटरी कहीं से लकीज है या फिर नहीं इसके बाद बैटरी में नेगेटिव और पॉजिटिव टर्मिनल बनाए जाते हैं जिस पर हम अपने इनवर्टर के वायर लगाते हैं और इन सब के बाद बैटरी के ऊपर सीरियल नंबर की प्रिंटिंग की जाती है सीरियल नंबर से बैटरी की मैन्युफैक्चरिंग की सारी जानकारी मिल जाती है और जब भी बैटरी की वारंटी क्लेम करनी होती है तब इसी सीरियल नंबर से क्लेम किया जाता है और अब बैटरी बनकर तैयार हो गई है और इसके अंदर सल्फ्यूरिक एसिड डाला जाता है और बैटरी के अंदर एसिड सिर्फ एक ही बार डाला जाता है उसके बाद यदि बैटरी में एसिड कम होता है तो उसके अंदर पानी डाला जाता है.

7.Lead-acid Battery Charging Testing Process

एसिड डालने के बाद बैटरी को चार्ज किया जाता है चार्ज करने के बाद बैटरी की फिर से टेस्टिंग की जाती है जिसमें बैटरी की वोल्टेज करंट और ग्रेविटी को चेक किया जाता है और यह सब टाइटल आने के बाद बैटरी को धोया जाता है ताकि इसके ऊपर लगा हुआ एसिड वगैरह और हानिकारक मटेरियल लगा हुआ हो वह उतर जाए और यह सभी प्रोसेस होने के बाद बैटरी को बॉक्स के अंदर पैक कर दिया जाता है और उसके बाद मार्केट में भेज दिया जाता है.

तो ऐसे एक इनवर्टर बैटरी को बनाया जाता है अगर इसके अलावा किसी और बैटरी के बारे में जानना चाहते हैं तो पोस्ट के कमेंट बॉक्स में कमेंट करके हमसे पूछ सकते हैं या इसके बारे में अभी भी आपका कोई सवाल या सुझाव हो तो नीचे कमेंट करके जरूर बताएं .

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